इलाहाबाद हाईकोर्ट और उसकी लखनऊ पीठ में 8 जून से पहले की तरह काम होगा, जिसमें मामलों की फ़िज़िकल फ़ाइलिंग भी की जा सकेंगी। ( रिपोर्ट:-राजेश कुमार यादव )

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इलाहाबाद हाईकोर्ट और उसकी लखनऊ पीठ में 8 जून से पहले की तरह काम होगा, जिसमें मामलों की फ़िज़िकल फ़ाइलिंग भी की जा सकेंगी।

रिपोर्ट:-राजेश कुमार यादव

हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालत ने जो विशेष पीठ गठित कर रखी हैं वे अगले आदेश तक काम करती रहेंगी और किसी भी समय अदालत कक्ष में 6 से ज़्यादा वकीलों को मौजूद रहने की इजाज़त नहीं होगी।

वक़ील की मांंग पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से केस की सुनवाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। अगर कोई पक्ष ख़ुद अदालत में पेश होना चाहता है तो ऐसा सिर्फ़ वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से ही होगा।

अदालत ने नए मामले की फ़िज़िकल फ़ाइलिंग की अनुमति भी 3 जून से दे दी है और वकीलों को ई-फ़ाइलिंग या फ़िज़िकल फ़ॉर्म में केस दायर करने की इजाज़त होगी, जिनमें तत्काल सुनवाई के मामले नहीं होंगे। यह याद रखने की बात है कि सिर्फ़ ऐसे मामले जिनकी तत्काल सुनवाई की ज़रूरत है, उनकी ई-मोड में फ़ाइलिंग की इजाज़त होगी और ऐसे मामले सुनवाई के लिए लिस्ट होंगे।

वक़ील अपने मामले/दस्तावेज़/याचिकाएं/आवेदन स्टाम्प रिपोर्टिंग सेक्शन और आवेदन सेक्शन में दायर कर सकते हैं और इलाहाबाद और लखनऊ में ये निर्दिष्ट स्थानों पर काम करेंगे। ई-फ़ाइलिंग के लिए कोर्ट की फ़ीस जमा कराने के लिए हाईकोर्ट परिसर के बाहर कम से कम पांच काउंटर काम करेंगे।

जो वक़ील हॉट स्पॉट क्षेत्र/कंटेनमेंट क्षेत्र में रहते हैं, उन्हें अदालत परिसर में प्रवेश की इजाज़त नहीं होगी और न ही उनसे किसी तरह के दस्तावेज़ स्वीकार किए जाएंगे।

हलफ़नामे की ज़रूरत

अदालत ने कहा है कि तथ्यों के समर्थन में हलफ़नामा दायर करने की ज़रूरत इन स्थितियों में नहीं होंगी –

अगर मुक़दमादार इलाहाबाद/लखनऊ में यह वादा करने की स्थिति में नहीं है और उसने अपने वक़ील के माध्यम से यह लिखित आश्वासन दिया है कि जो भी कहा गया है वह उसके मुवक्किल के मौखिक/लिखित निर्देश के अनुसार है।

लॉकडाउन की अवधि के दौरान मामले में हलफ़नामा/ई-हलफ़नामा/स्कैंड नोटरी हलफ़नामा देना ज़रूरी नहीं होगा और इसके बदले जो व्यक्ति गवाही देना चाहता है उसे अपना आधार नंबर देना होगा इस घोषणा के साथ कि आवेदक/याचिककर्ता ने आवेदन/याचिका में जो विवरण दिया है वह सही है।

हलफ़नामा दायर करने में जो छूट दी गई है वह इस शर्त से बंधी है कि लॉकडाउन हटने के बाद एक माह की अवधि के भीतर उचित हलफ़नामा दायर किया जाएगा।

यह भी कहा गया है कि वकीलों और अदालत के अन्य कर्मचारियों के लिए अदालत में प्रवेश/निकास के लिए कौन से द्वार खुले रहेंगे ।

अदालत ने यह भी कहा है कि हाईकोर्ट परिसर में वकीलों के कक्ष और कैंटीन और दुकानें बंद रहेंगी। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन के बारे में भी निर्देश दिए गए हैं।

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