कुशीनगर में बैंक से लिए लोन को चुकाने में आ रही कानूनी अड़चन से नाराज अनुसूचित जाति का कुनबा धर्म परिवर्तन करने पर हुआ उतारू ( रिपोर्ट : गोल्डेन कुशवाहा )

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कुशीनगर में बैंक से लिए लोन को चुकाने में आ रही कानूनी अड़चन से नाराज अनुसूचित जाति का कुनबा धर्म परिवर्तन करने पर हुआ उतारू

गोल्डेन कुशवाहा

पडरौना,कुशीनगर : जिले में एक अनुसूचित जाति का परिवार द्वारा बैंक से लिए गए कर्ज चुका न पाने के चलते धर्म परिवर्तन करने पर उतारू है.कर्ज न चुका पाने के कारण अब बैंक ने इस परिवार के घर की नीलामी के लिए नोटिस जारी कर कब्जे में लेने की बात कह रहा है.जिसे देखते हुए यह अनुसूचित जाति के बिरादरी के परिवार धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म अपनाने के मूड में है।

दरअसल यह अनुसूचित परिवार यानी चमार जाति के मोहन प्रसाद का कुनबा पडरौना तहसील क्षेत्र के सिधुवा मिश्रौली गांव के सिधुवा स्थान मंदिर के पास का रहने वाला है.यह पूरा मामला 2015 का है.जब इस परिवार ने अपनी गौशाला व्यवसाय के लिए बैंक से 9 लाख रुपए का लोन लिया था.लेकिन इसी बीच इस परिवारों में मोहन प्रसाद के पिता की पैरालिस्ट बीमारी हो जाने की वजह से गौशाला से जुड़ी व्यवसाय से मिलने वाली रुपए दवा इलाज में खर्च हो गए.जबकि मोहन प्रसाद की मां का भी गौशाला में गाय को चारा डालने के दौरान गिरने की वजह से रीढ़ की हड्डी में चोट आने का वजह से आज भी दवा कराने पर मजबूर हैं.इस पीड़ित अनुसूचित जाति परिवार का आरोप है.कि इतना सब कुछ जानने के बावजूद बैंक इन के घर पर नोटिस जारी कर नीलामी करने की धमकी दी रही दे रहा है। परेशान हो चुके अनुसूचित जात से जुड़े मोहन प्रसाद का कहना है.कि कानूनी अड़चन होने के चलते अपने ही भूमि को नहीं भेज पा रहा हूं.जिससे मैं बैंक का कर्जा चुका सकूं।
ऐसे में पीड़ित मजबूर होकर यह परिवार चेतावनी दी है.कि अगर बैंक से मुझे समय व इसका कोई इसका विकल्प नहीं दिया तो परिवार संग इस्लाम धर्म अपना लेंगे.मोहन प्रसाद के बने घर समेत सवा दो डिसमिल ही खेती वाली जमीन बची है.उसी पर इनका पूरा परिवार आश्रित है.पीड़ित मोहन की मां का इलाज चल रहा है.जबकि बड़े बेटे दीपक व छोटे बेटे के साथ बिटिया उज्वाला कुमारी की पढ़ाई लिखाई भी बंद है.मगर कोई मदद करने वाला नहीं है.मोहन के अनुसार वह अपने बच्चे जमीन को अच्छे रुपए मिलने पर बैंक से लिए कर्ज को चुकाने के लिए तैयार है.हालांकि मोहन प्रसाद द्वारा 2015 में बैंक से 9 लाख रुपए ही लोन लिए थे.मगर बैंक वाले अब ब्याज जोड़कर 14 लाख रुपया मांग रहे हैं.अगर उसके साथ न्याय नहीं होता है.तो वह मजबूरन पूरे परिवार के साथ धर्मांतरण करने को मजबूर हो जाएगा.फिलहाल मोहन प्रसाद ने अभी जिला प्रशासन सहित तमाम जगहों पर पत्र न देकर सोशल मीडिया के अलावे पत्रकारिता जगत से जुड़े पत्रकार से ही से अपनी समस्या से निजात पाने की अनुरोध किया है।

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