वाराणसी:- मीडिया में आया मामला, तो दर्ज किया आदमपुर पुलिस ने एफआईआर, मिली जिसको विवेचना उसी विवेचक पर है बड़े सवाल ( रिपोर्ट:- राजेश यादव )

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मीडिया में आया मामला, तो दर्ज किया आदमपुर पुलिस ने एफआईआर, मिली जिसको विवेचना उसी विवेचक पर है बड़े सवाल

एफआईआर दर्ज करने पर भी खेला पुलिस ने खेल

विवेचक राजकुमार की भूमिका पर बड़े सवाल

विवादित चबूतरा” को संरक्षण देते दरोगा राजकुमार

रिपोर्ट राजेश कुमार यादव

वाराणसी। वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र के सलेमपुरा में किशोरी की आत्महत्या के प्रकरण को पुलिस द्वारा लाख दबाने की कोशिश किया गया। स्थानीय चौकी इंचार्ज राजकुमार के द्वारा हुवे सभी प्रयास असफल हुवे और मीडिया में मामला उछलने पर अंततः पुलिस ने अपनी नाक बचाई और पीड़ित परिवार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। कल रात भर दौड़े परिजनों को रात भर पुलिस टालती रही। इस बीच मामला मीडिया में उछलना शुरू हो गया और पुलिस ने मामले में अपनी नाक आखिर बचाने के लिये उच्चाधिकारियो के संज्ञान में मामला आने के बाद पुलिस ने सुबह लगभग 8 बजे मामला 306 आईपीसी में दर्ज कर लिया।
मामला दर्ज तो पुलिस ने कर लिया मगर उसमें भी पुलिसिया खेल हो गया। कानूनी जानकारो ने पीड़ित परिजनों द्वारा दर्ज तहरीर को देख कर बताया कि इस मामले में पॉक्सो और आईपीसी 376 भी दर्ज होना था। मगर मात्र 306 के तहत मामला पुलिस ने दर्ज किया। शायद स्थानीय चौकी इंचार्ज ने सम्बन्धो की लाज रख लिया और बड़े धाराओं से बचा दिया है। अब विवेचना भी उनकी दरोगा जी को करना है तो धाराये ईजाद करने का मतलब ही नही होता है। *मृतक की बहन द्वारा मिली तहरीर में स्पष्ट लिखा है कि आरोपी युवक द्वारा मृतक नाबालिग को प्रेम पाश में बहाल फुसला कर शादी का वायदा करके उसका फायदा उठाया।* इन बंद शब्दो को समझकर मामले में 376 जैसी धाराओं का लगना आवश्यक था, मगर पुलिस ने सिर्फ 306 से ही काम चला लिया। जबकि मृतका की उम्र 16 साल थी।

जिस दरोगा की भुमिका संदिग्ध वही बने विवेचक

मामले की विवेचना दरोगा राजकुमार को मिली है। जबकि उनकी भूमिका मामले में पूरी तरह से सवालों के घेरे में रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतका ने लगभग 6-7 माह पहले क्षेत्र के एक युवक के खिलाफ छेड़खानी की तहरीर दिया था, मगर दरोगा जी ने कोई कार्यवाही नही किया। इसी मामले में भी दरोगा जी की भूमिका बड़े सवाल पैदा कर रही है। पीड़ित ने जहर 29 मई को सुबह 11 बजे खाया था, और उसको मंडलीय अस्पताल भर्ती करवाई गई। अस्पताल ने उसी दिन पुलिस मेमो आदमपुर भेज दिया। जिसकी प्रति दरोगा जी को उसी दिन मिल गई। जिसके बाद दरोगा जी ने 30 मई को मृतका से बयान अस्पताल जाकर लिया। मगर पुलिस सूत्र बताते है कि दरोगा जी ने कोई तसकिरा थाने पर नोट नही करवाया। यही दरोगा जी का खेल यही खत्म नही हुआ। आज जब ऊपर से दबाव आया तो दरोगा जी मृतका के घर गए। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि मृतक की मॉ ने चिल्ला चिल्ला कर रो रो कर अपनी व्यथा सुनाई। सामने सरकारी जमीन पर निर्मित चबूतरे पर अपराधियो के बैठने की बात कही। मगर दरोगा जी ने बात को नजरअंदाज कर डाला। आरोपी के घर गए और आरोपी है कि नही पूछ कर वापस चले गए। फिर कुछ देर बाद आये और उसके एक चचेरे भाई को लेकर चले गए। इस दौरान दरोगा जी को कथित रूप से आरोपी नही मिल सका। *सूत्र तो ये भी कहते है कि दरोगा जी ने खुद का संबंध निभा लिया और पीड़ित को इंसाफ अब दिलवा देंगे ये शंका पैदा करता है।* अब कैसे इंसान यकीन करें इन दरोगा जी के इंसाफ का। जब उनका संबंध इतना घनिष्ट आरोपी पक्ष के साथ है, तो फिर इंसाफ की बात करने का मतलब नही होता है।

क्या अब सूख गई कलम के सिपाही की कलम

मामले में पत्रकारों की कार्यशैली पर भी उंगली उठाया जा सकता है। पूरे वाराणसी शहर के पत्रकार मामले की जानकारी रखते है और लिख भी रहे है। खबरे भी चल रही है। मगर शहर के एक वरिष्ठ पत्रकार इसी मुहल्ले में रहते है। अपराध के ऊपर लिखी गई उनकी कई खबरों और लेख ने काफी प्रसिद्धि भी पाई है। कलम का सिपाही व्हाट्सएप पर लिखकर बैठे वरिष्ठ पत्रकार की कलम शायद इस मामले में सुख गई होगी क्योंकि उनके कलम से एक शब्द भी नही निकला है। सिंपल क्राइम की रनिंग स्टोरी तक महोदय नही लिख सके है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि महोदय कही इस मामले में कलम नही चलाना चाहते है। या फिर कलम चल नही रही है।

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