वाराणसी:- वाराणसी मे दरोगा पर जानलेवा हमला कर लूट, अपहरण करने वालें आरोपियों की जमानत खारिज ( रिपोर्ट:- राजेश कुमार यादव )

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वाराणसी मे दरोगा पर जानलेवा हमला कर लूट, अपहरण करने वालें आरोपियों की जमानत खारिज

रिपोर्ट राजेश कुमार यादव

अभियोजन का पक्ष शासकीय अधिवक्ता (प्रभारी) मुनीब सिंह चौहान ने रखा व वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह व संजय सिंह दाढ़ी ने रखा। डियूटी से लौट रहे दरोगा को मारपीट कर, घायल करने, रुपया और मोटरसाइकिल लूटने के मामले में आरोपी रिचेश कुमार सिंह, प्रशांत कुमार यादव उर्फ मिंटू व चंद्रशेखर यादव उर्फ आजाद की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए वाराणसी के ज़िला जज उमेश कुमार शर्मा ने बलहीन पाते हुए खारिज कर दिया। अभियोजन का पक्ष शासकीय अधिवक्ता (प्रभारी) मुनीब सिंह चौहान व वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह और संजय सिंह दाढ़ी ने रखा।

अभियोजन के अनुसार वादी मुक़दमा आलोक कुमार सिंह जो कैंट थाना में उप निरीक्षण के पद पर नियुक्त है तथा ज्ञानवापी सुरक्षा ड्यूटी में बाबा विश्वनाथ के पी.एस.ओ. ड्यूटी में तीसरी पाली में सादे कपड़ों में तैनात है। दिनांक 14 व 15 अप्रैल 2020 की रात्रि लगभग 12:10 पर ड्यूटी से अपने वर्तमान आवास अशोकपुरम् कालोनी आ रहा था तभी सिर गेट के पास बीचो-बीच सड़क पर एक पल्सर गाड़ी पर तिरछा लगायें व्यक्ति ने रूकने का इशारा किया। रुकते ही गाली गलौज करतें हुए मारपीट करना शुरू कर किया। इस बीच पीछे से स्कूटी से आये दो युवक भी उसे मारने-पीटने लगे, जिससे उसकी गाड़ी जमीन पर गिर गयी। मारपीट कर उसके पॉकेट से 9500/ रुपया जो नई सीरीज का था छीन लिये और मोटरसाइकिल लूट लिया। इस बीच उनकी नज़र वादी उप निरीक्षक आलोक सिंह के आई कार्ड पर पड़ी तो उसे छीनते हुए एक युवक ने कहा कि इ तो साला दरोगा है। मिंटू नाम के युवक ने कहा कि तब इसे जान से मार दिया जाय नहीं तो हम लोगों के लिए खतरा बन जायेगा। इसके बाद उसे जान से मारने की नियत से गला दबाकर तथा पेट व छाती पर गहरी चोट लगाने का प्रयास कर मारने लगे। तभी उसमें से एक व्यक्ति ने कहा कि इसे यहां से दूसरी जगह ले जाकर मारते हैं नहीं तो पुलिस आ जाएगी। यह कह कर जबरदस्ती अपहरण कर अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर ले जाने लगे इसी बीच एक युवक उसकी मोटरसाइकिल को जल्दी से स्टार्ट करने का प्रयास किया जो नहीं हो सकी और इसकी लूटी मोटरसाइकिल को छोड़ कर उसे जल्दी से सीर गांव की तरफ ले जाने लगे। वादी आलोक सिंह किसी तरह जान बचाकर भागा और लंका थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

अभियुक्त रिचेश कुमार सिंह की तरफ से तर्क दिया गया है कि आवेदक /अभियुक्त निर्दोष हैं। पुलिस द्वारा गलत तरीके से आरोपित करके फसा दिया गया है। घटना में शामिल होने से इनकार किया गया और झूठे मुकदमे में फसाने की बात कही गई।

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