संतकबीरनगर:- अब दूर से ही दीदार होगा कबीर समाधि व मजार का ( रिपोर्ट:- सत्य प्रकाश )

0
121

अब दूर से ही दीदार होगा कबीर समाधि व मजार का

रिपोर्ट:- सत्य प्रकाश

संत कबीर नगर।संत कबीर की महा परिनिर्वाण स्थली कबीर चौरा का दूर से ही दीदार होगा।इसके चारो तरफ बने पुराने भवनो को पुरातत्व विभाग ने गिरा कर हटा दिया है।जिससे कबीर समाधि की सुन्दरता को चार चांद लग सके और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करे।
विश्व के महान समाज सुधारक संत एवं साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक सदगुरू कबीर की महापरिनिर्वाण का निर्माण लगभग 250 वर्ष पूर्व में किया गया था।बाहर से आने वाले संत एवं श्रद्धालुजन को ठहरने का सुरक्षित स्थान था।जिसे पुरातत्व विभाग के की अनुमति पर पूरे परिसर का पर्यटन मंत्रालय द्वारा सुन्दरीकारण का कार्य कराया जा रहा है।जिसमे कबीर समाधि व मजार और साधना स्थल(गुफा) के सुन्दरीकारण का कार्य तेजी के साथ चल रहा है।कबीर चौरा के सुन्दरीकारण में लगभग 250 साल पुरानी इमारत कबीर चौरा परिसर में समाधि के चारो तरफ लगभग 20कमरे के पुराने भवनों को तोड़ कर हटा दिया गया है।इस पुराने भवन में कलाकृतियां भी उकेरी गई थी।जो अब इतिहास बन कर रह गया है।इस पुराने भवन में कबीर चौरा मगहर मठ के महंत सहित अन्य संत निवास करते थे।इसके अलावा बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों को भी ठहरने की समुचित व्यवस्था मिल जाती थी।समाधि के चारो तरफ से पुरानी इमारत को हटाए जाने से जहां कबीर समाधि और मजार का लोग मुख्य द्वार मे घुसने के साथ ही दर्शन प्राप्त होगा।तो वहीं गर्मी और बरसात के महिनों में सर छिपाने की जगह नहीं रह जायेगी।कबीर समाधि के चारो ओर से पुरानी इमारत को हटाए जाने के बाद लोहे की गिरिल लगाया जा रहा है।इसके साथ ही लाल पत्थर लगा कर पुराने रूप में दिखाने की योजना है।

क्या कहते हैं महंत
इस संबंध में महंत विचार दास का कहना है कि पूरे परिसर का विकास और सुन्दरीकारण किया जा रहा है।जिससे कुछ समस्या सामने आई हैं।उन्होनें कहा कि समाधि स्थल से कुछ दूरी पर आगन्तुक कक्ष का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।उसी भवन में उनके निवास की व्यवस्था दी जायेगी।इसके अलावा समाधि एवं मजार के चारो तरफ फूलदार पौधे और घांसे लगाई जाएंगी ताकि बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों को आकर्षित कर सके।

क्या कहते हैं पुरातत्व अधिकारी
पुरातत्व के क्षेत्रीय अधिकारी नरसिंह त्यागी ने बताया कि कबीर समाधि व मजार के पुरातात्त्विक स्वरूप को कायम रखने और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित कर उसका सुन्दरीकारण किया जाना आवश्यक होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here