संतकबीरनगर:- ●मानव जीवन में व्याप्त चिंता, क्रोध, एवम तनाव से उबरने में कारगर है सहज योग ( रिपोर्ट:- केदारनाथ दुबे )

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मानव जीवन में व्याप्त चिंता, क्रोध, एवम तनाव से उबरने में कारगर है सहज योग

●जीवन में आध्यात्मिक आनंद तथा उन्नति प्राप्ति में सहायक है सहज योग

●सहज योग रोग प्रतिकारक क्षमता के विकास में है सहायक

●लॉक डाउन में सहजयोगी कर रहे है ऑनलाइन ध्यान

●ऑनलाइन माध्यमो से 50 देशों के लगभग 2 लाख लोग कर रहे है ध्यान

रिपोर्ट केदार नाथ दूबे

संत कबीर नगर संवाददाता | आज संपूर्ण विश्व कोरोना नामक वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। चारो तरफ निराशा का माहौल व्याप्त है। उपचार के कोई भी संसाधन उपलब्ध नही है। ऐसी स्थिति में दुनिया के कई देशों ने यह स्वीकार भी किया है कि इस विषाणु से निजात पाने हेतु ध्यान और आध्यात्म महत्वपूर्ण साबित हो सकते है। इस प्रक्रिया में सहज योग जो दुनिया के लगभग 140 देशों में पूर्णतः निःशुल्क संचालित होता है। इस लॉक डाउन के दौरान भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में फैले अपने साधको के लिए आनलाइन ध्यान की प्रक्रिया से जोड़ने का एक सफल प्रयोग किया है। यह जानकारी देते हुए “निर्मला देवी सहज योग ट्रस्ट” सन्त कबीर नगर के जिला समन्वयक माधवेन्द्र तिवारी ने बताया कि लॉक डाउन के बाद भी अपने साधको के सामूहिक ध्यान को नियमित करने हेतु ऑनलाइन ध्यान संचालित किया गया है। इस ऑनलाइन ध्यान कार्यक्रम का संचालन परम् पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल “प्रतिष्ठान पुणे” के माध्यम से किया जा रहा है। यूट्यूब लाइव के साथ ही “इंडिया सहजयोग फेसबुक पेज” एवम “मिक्सलर रेडियो” पर भी लाइव कार्यक्रम प्रसारित किया जा रहा है। सभी साधक प्रातः ध्यान हेतु सुबह 5:30 बजे एवम सायं काल ध्यान 7 बजे इन विभिन्न सोशल मीडया के माध्यम से कर सकते है। आगे बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सहज योग एक सूक्ष्म एवं जीवन्त क्रिया है। जिसमें शरीर के अंदर की शक्ति का योग प्रकृति में व्याप्त परमात्मा की प्रेम शक्ति से हो जाता है और हमारे अंदर परमात्मा की शक्ति चैतन्य के रूप में बहने लगती है और हम परमात्मा से जुड़ जाते हैं। इसी घटना को आध्यात्मिक जगत में योग कहते हैं। इस क्रिया की खोज परम पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी ने किया था। सहज योग के माध्यम से मानव जीवन में व्याप्त चिंता क्रोध तनाव कम होने लगते हैं। एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास होने लगता है। लोग विभिन्न प्रकार की कुप्रवृत्तियों से छुटकारा पाने लगते हैं तथा जीवन में आध्यात्मिक आनंद तथा उन्नति प्राप्त होने लगता है। इसका आनंद सभी धर्मों के लोग प्राप्त कर सकते हैं यह क्रिया नियमित ध्यान धारणा से संभव है। यह कुण्डलिनी जागरण पर आधारित है। कुण्डलिनी सभी मानव के अंतर व्याप्त है इनमें सात ऊर्जा के केंद्र है जिसे हम सात चक्र की संज्ञा देते है। शरीर के अंदर किसी भी प्रकार का विकार उत्पन्न होने का अर्थ है कि इन ऊर्जा केंद्रो अथवा चक्रों में विकार उत्पन्न होना। अतः इसे ध्यान और धारणा से संतुलन की स्थिति बनाते हुए विभिन्न्न समस्याओ का निराकरण किया जा सकता है। इस प्रकिया से व्यक्ति तनाव एवम सभी प्रकार की चिंता से मुक्त होकर एक अलग प्रकार के आनन्द की अनुभूति करता है जिसे आध्यत्मिक भाषा में परमानन्द कहते है। इस प्रक्रिया से व्यक्ति के अंदर रोग प्रतिकारक क्षमता का विकास होता है। जो इस महामारी में लोगो के लिए सहायक है। इस लॉक डाउन के समय में सोशल मीडिया एवं प्रौद्योगिकी का सकारात्मक उपयोग करते हुए विश्व के लोगों का एक साथ सामूहिकता में ध्यान करना उनके शारीरिक,मानसिक,स्वाथ्य को सुनिश्चित करने के साथ साथ तनाव एवम चिंता से मुक्त रखने में सहायक सिद्ध हो रहा है। ट्रस्ट द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार इस लॉक डाउन के दौरान अब तक लगभग 50 देशों के 2 लाख से अधिक लोगो ने सहज योग ध्यान के ऑनलाइन सत्र में सामूहिकता में ध्यान किया। अपने जिले के सैकड़ो साधक घर बैठे ही इसका लाभ प्राप्त कर रहे है। नए साधक हमारे टोल फ्री नम्बर 180030700800 पर फोन करके इस ध्यान से निःशुल्क जुड़ सकते है।

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