हरियाणा:- पति-पत्नी एक-दूसरे के मोबाइल फोन की बातें रिकॉर्ड नहीं कर सकते :-पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (रिपोर्ट:-राजेश कुमार यादव)

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पति-पत्नी एक-दूसरे के मोबाइल फोन की बातें रिकॉर्ड नहीं कर सकते :-पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

रिपोर्ट:-राजेश कुमार यादव

एक केस की सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस कहा कि पति या पत्नी द्वारा बिना बताए मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग गोपनीयता का उल्लंघन है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक बच्चे की बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी द्वारा एक दूसरे को बिना बताए निजी बातचीत की रिकॉर्डिंग करना गोपनीयता का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी पति द्वारा पत्नी को दुराचारी दिखाने के लिए पेश की गई टेलीफोनिक बातचीत की एक रिकॉर्ड पेश करने पर की है। हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी की बातचीत को रिकार्ड करने का पति का ऐसा अंडरकवर आचरण एक कानूनी तौर पर किसी की निजता का उल्लंघन है, इसको किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता।

पति ने दोषपूर्ण तरीका अपनाया

मां को बच्ची न मिल सके इसके लिए पति ने पत्नी को दोषपूर्ण तरीके अपनाकर, वैवाहिक कलह से उत्पन्न होने वाली बातचीत को रिकॉर्ड किया, ताकि उसे बच्ची से वंचित किया जा सके। इस मामले में एक महिला ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, उसने आरोप लगाया था कि उसका पति उसकी 4 साल की बेटी को गलत तरीके से छीन कर ले गया और अपने पास रखे हुए है। दोनों पति और पत्नी आईटी पेशेवर हैं और एक लोकप्रिय सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं।उन्होंने 2012 में शादी कर की थी। नवंबर 2019 में, वे अलग हो गए।

पति बच्चे काे साथ ले गया

पति बच्चे को बीमारी का इलाज कराने के बहाने अपने साथ ले गया और जल्द ही वापस आने का वादा किया। उन्होंने अपने माता-पिता के साथ रहना शुरू कर दिया। दिसंबर 2019 में, उन्होंने बच्चे की कानूनी हिरासत के लिए संरक्षकता और वार्ड अधिनियम, 1890 के तहत मामला दर्ज किया। यह मामला सिविल जज के समक्ष लंबित है। मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि हर बच्चा एक राष्ट्रीय संपत्ति है।

कोर्ट का यह कर्तव्य भी है कि वह मुसीबत में पड़े बच्चे के कल्याण और हित को देखे और सुनिश्चित करे, जो उसकी परवरिश के लिए सबसे उपयुक्त हो।

ये दिए आदेश

मां एक छोटी सी उम्र के बच्चे की देखभाल के लिए सबसे पहले और सबसे उपयुक्त है

कोर्ट ने पिता को नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसकी मां को सौंपने के भी आदेश दिए

पिता को प्रत्येक शनिवार और रविवार को शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच बच्चे को मिलने की छूट भी दी।

ये था मामला:

पत्नी को दुराचारी दिखाने के लिए पति ने हाईकोर्ट में पेश किया था टेलीफोनिक बातचीत का रिकॉर्ड करना गलत है

हाईकोर्ट ने कहा-पति का ऐसा अण्डर कवर आचरण गलतहै

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