संत कबीरनगर :पिता को याद करके निकल पड़े आंसू भाव विभोर हो उठे समाजसेवी डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी ( रिपोर्ट : विजय गुप्ता )

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पिता को याद करके निकल पड़े आंसू भाव विभोर हो उठे समाजसेवी डॉ उदय प्रताप चतुर्वेदी

संतकबीरनगर।

बच्चों के लिए मां की ममता और पिता का वात्सल्य इतिहास की शोभा बढाता है। देश के संस्कृति और सभ्यता के मूल मे बसे ममता और वात्सल्य के बीच जब एक पुत्र की पिता के प्रति श्रद्धा, सम्मान और विछोह सामाजिक पटल पर छलक उठे तो जनमानस भी खुद के दिली क्रन्दन से द्रवित हो उठता है। जी हां शुक्रवार को जब भिटहा स्थित “चतुर्वेदी विला” पर आयोजित रामायण पाठ के समापन अवसर पर जब सूर्या के एमडी डा उदय प्रताप चतुर्वेदी अपने स्व पिता पं सूर्यनारायण चतुर्वेदी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते समय बिलख बिलख कर रो उठे तो मौजूद लोगों आंखे भी छलक उठीं। संघर्षों की कोख से जब कबीर की मिट्टी से पूर्वांचल के मालवीय स्व पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी का जब शैक्षणिक प्रादुर्भाव हुआ तो समूचा क्षेत्र उच्च, आधुनिक और बालिका शिक्षा के क्षेत्र मे जमीन पर रेंगता नजर आ रहा था। ऐसा मे स्व पं सूर्य नारायण चतुर्वेदी ने शिक्षा की जो ज्योति जलाई वह न सिर्फ पूर्वांचल के कण कण मे समा उठा बल्कि उनके आंगन मे भी शिक्षा और संस्कार ज्योति जगमगा उठी। सात दिनों तक “चतुर्वेदी विला” मे चले महामृत्युंजय मंत्र के उच्चारण के बाद शुक्रवार को जब रामायण पाठ का समापन हुआ तो पिता की आराधना के दौरान अचानक माहौल गमगीन हो उठा। स्व पिता को अपना श्रद्धा सुमन समर्पित करते समय उनके ज्येष्ठ पुत्र एवं सूर्या के एमडी डा उदय प्रताप चतुर्वेदी अचानक फफक फफक कर बिलख उठे। बड़े बेटे को बिलखता देख उनकी मां भी सिसकते हुए बेटे ढांढस बंधाती नजर आईं। पिता की याद मे बिलखते सपूत के आंसुओं की धार को रोकने मे जुटी मां के अद्भुत स्नेह ने मौजूद लोगों को भी द्रवित कर दिया। ऐसे मे मौजूद हर शख्सियत पिता विछोह मे सिसकते बेटे और मां के सामंजस्य के आगे सभी को बौना बना डाला।

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